Tuesday, September 4, 2018

  हो कंसों के साथ कन्हैया

अहले गोकुल पूछ रहे हैं इक छोटी सी बात कन्हैया
छोड़ के हमको बोलो कैसे हो कंसों के साथ कन्हैया

नाम तुम्हारा ले लेकर वो मुझको ही ललकार रहे
 भक्त बने सब खींच रहे हैैं चीर मेरा दिन-रात कन्हैया

नाग द्वेष का फन काढ़े फिर आ बैठा है यमुना में
साथ हमारे है तो पहले आके उसको नाथ कन्हैया

दहशत का पहरा है अबके होठ पे सबके ताले हैं
सांँसत में हैं इस धरती पर फिर गांँधी सुकरात कन्हैया

मानवता की लाज बचाने आए थे तुम धरती पर
दिखला दो इसबार वही फिर से  औकात कन्हैया

माल ख़ज़ाने मत दो हमको तुमसे है अरदास यही
देना है तो दे जाओ बस इज़्ज़त की सौगात कन्हैया

पनघट सारे सूने सूने सहमी सहमी राधा है
बेकाबू-सी फ़ैल रही है दुष्कर्मों की रात कन्हैया

शंख महाभारत का  तुमने  फूंक दिया था जाने क्यों
चुप बैठे हो बदतर है जब उससे भी हालात कन्हैया

प्रलय बिगुल हम फूंक रहे हैं कर देना तू माफ़ हमें
सहते जाएंगे कबतक यूं ज़ुल्मों के आघात कन्हैया


  हो कंसों के साथ कन्हैया

अहले गोकुल पूछ रहे हैं इक छोटी सी बात कन्हैया
छोड़ के हमको बोलो कैसे हो कंसों के साथ कन्हैया

नाम तुम्हारा ले लेकर वो मुझको ही ललकार रहे
 भक्त बने सब खींच रहे हैैं चीर मेरा दिन-रात कन्हैया

नाग द्वेष का फन काढ़े फिर आ बैठा है यमुना में
साथ हमारे है तो पहले आके उसको नाथ कन्हैया

दहशत का पहरा है अबके होठ पे सबके ताले हैं
सांँसत में हैं इस धरती पर फिर गांँधी सुकरात कन्हैया

मानवता की लाज बचाने आए थे तुम धरती पर
दिखला दो इसबार वही फिर से  औकात कन्हैया

माल ख़ज़ाने मत दो हमको तुमसे है अरदास यही
देना है तो दे जाओ बस इज़्ज़त की सौगात कन्हैया

पनघट सारे सूने सूने सहमी सहमी राधा है
बेकाबू-सी फ़ैल रही है दुष्कर्मों की रात कन्हैया

शंख महाभारत का  तुमने  फूंक दिया था जाने क्यों
चुप बैठे हो बदतर है जब उससे भी हालात कन्हैया

प्रलय बिगुल हम फूंक रहे हैं कर देना तू माफ़ हमें
सहते जाएंगे कबतक यूं ज़ुल्मों के आघात कन्हैया