भेज दो अपनी बेटियों को जंगलमें
ख़ुद से संवर जाएँगी
बेखौफ चाँद पर उतर जाएँगी
क्योंकि बस और ट्रेनें नहीं चलतीं
वहाँ कारों में लिफ्ट देने का चलन
भी नही है
और तो और
पुलिस न उसका आदमी है जंगलमें
बचना आबरू का लाजिमी है जंगलमें
जंगलमे इतना तो जरूर सीख जाएँगी
जब कभी वापस वहाँ से आएंगी
दम पर अपने ही जानवरों से निपट जाएँगी
शम्भू शरण मंडल
धनबाद
