हिन्दी का हाल
सुबह- सुबह जैसे ही
घर में फोन घनघनाया
समझा बुलावा कौन बनेगा
करोड़पति से आया
रिसिवर कान से सटा
और प्रश्न
एक विदेशी फ्रेंड का आया
यार आपके यहाँ हिन्दी
कैसी चल रही है
मैने कहा फूल फल रही है
हिन्दी
पखवाड़ों में पल रही है
साठ सालों से
बेचारी यों ही टल रही है
भाई देख
माँ किचेन तक जरूर फिट है
लेकिन बीवी
फौरेनवाली ही सुपरहिट है
तभी बीवी बड़बड़ाई झपटकर
रिसिवर हाथ से छुड़ाई
और डपटकर बोली
सुबह-सुबह हिन्दी बोल रहे हो
अरे अपनी तो फोड़ चुके किस्मत
अब बच्चों की क्यों फोड़ रहे हो
क्या मजाल इस हिन्दी में
बिन होंठ सटाए
लव यू, डीयर स्वीटहार्ट
सैंडल कह जाएं
फिर फिजूल में हम क्यों
लिपिस्टिक उड़वाएँ
मित्रों! अब तो समझ गए होंगे
मेरी मैडम हिन्दी बोलने से
घबड़ाती है
क्यों नौकर रमुआ को
रैम कहकर ही
बुलाती है.
